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संगीत चिह्न

अलंकार

छह अलंकार, हर एक दो बार उकेरा हुआ: चिह्न जैसा छपता है वैसा, और वही जगह स्वरों में खोलकर लिखी हुई — दोनों बजते हैं, और दोनों की लंबाई बिलकुल एक जैसी है।

स्वर के ऊपर एक चिह्न, और एक ही ध्वनि से चार बन जाती हैं। अलंकार दूसरे स्वर तय नहीं करता, बल्कि इसी एक स्वर को बजाने का ढंग तय करता है: लिखी हुई मात्रा पूरी बनी रहती है, और चिह्न बताता है कि उसके भीतर क्या होता है। हर अलंकार यहाँ दो बार खड़ा है — जैसा छपता है वैसा, और उसके नीचे स्वरों में खोलकर। दोनों रूप बराबर लंबे हैं; एक के बाद दूसरा सुनना ही लिखाई और ध्वनि के बीच की दूरी कान को दिखा देता है।

त्रिल

ऐसा लिखा जाता है
Engraved by Verovio 6.3.0-425dd7b

ऐसा सुनाई देता है
Engraved by Verovio 6.3.0-425dd7b

मुख्य स्वर और उसका ऊपरवाला पड़ोसी उतनी तेज़ी से बारी बदलते हैं जितनी में साफ़ बना रहे। कितनी बारियाँ हैं, यह चिह्न नहीं बताता; यहाँ चार जोड़ों में खोला गया है, और स्वर की मात्रा बिलकुल वही रहती है।

ऊपरी मोर्देन्त

ऐसा लिखा जाता है
Engraved by Verovio 6.3.0-425dd7b

ऐसा सुनाई देता है
Engraved by Verovio 6.3.0-425dd7b

ऊपर की ओर एक ही तेज़ कदम और वापसी, फिर मुख्य स्वर बना रहता है। चिह्न बिना रेखा की चिकनी टेढ़ी-मेढ़ी लकीर है। वह कदम पलक झपकने भर चलता है — मात्रा का बाकी पूरा हिस्सा मुख्य स्वर का है।

मोर्देन्त

ऐसा लिखा जाता है
Engraved by Verovio 6.3.0-425dd7b

ऐसा सुनाई देता है
Engraved by Verovio 6.3.0-425dd7b

यही नीचे की ओर: नीचे वाले पड़ोसी तक एक बार थोड़े को जाकर तुरंत वापस। चिह्न की टेढ़ी लकीर के बीच से एक खड़ी रेखा गुज़रती है। ऊपरी मोर्देन्त से इतना ही फ़र्क़ है, और वह आसानी से नज़र से चूक जाता है।

ग्रुपेत्तो

ऐसा लिखा जाता है
Engraved by Verovio 6.3.0-425dd7b

ऐसा सुनाई देता है
Engraved by Verovio 6.3.0-425dd7b

लिखे हुए स्वर के चारों ओर चार ध्वनियाँ: ऊपर का पड़ोसी, मुख्य स्वर, नीचे का पड़ोसी, मुख्य स्वर। चिह्न स्वर के ऊपर हो तो घुमाव तुरंत शुरू होता है; पीछे हो तो पहले स्वर ही बजता है और घुमाव अंत में आता है।

लघु अग्रस्वर

ऐसा लिखा जाता है
Engraved by Verovio 6.3.0-425dd7b

ऐसा सुनाई देता है
Engraved by Verovio 6.3.0-425dd7b

छोटे स्वर की झंडी पर एक आड़ी रेखा होती है, और उसे जितना हो सके छोटा बजाया जाता है। मुख्य स्वर से वह लगभग कुछ नहीं लेता: वह ताल पर गिरता है, और मुख्य स्वर तुरंत पीछे आ जाता है।

दीर्घ अग्रस्वर

ऐसा लिखा जाता है
Engraved by Verovio 6.3.0-425dd7b

ऐसा सुनाई देता है
Engraved by Verovio 6.3.0-425dd7b

बिना रेखा वाला छोटा स्वर किनारे का शृंगार नहीं, बल्कि लटकता हुआ स्वर है। वह मुख्य स्वर की मात्रा का आधा — बिंदुवाले स्वर में दो-तिहाई — ले लेता है और उसके बाद ही खुलता है। लिखा छोटा जाता है, पर सुनाई वही देता है।

ऊपर से या मुख्य स्वर से?

मतभेद ठीक यहीं है: त्रिल लिखे हुए स्वर से शुरू होता है या उसके ऊपरवाले पड़ोसी से? बरोक काल में, और मोत्सार्ट तक भी, यह ऊपर से शुरू होता है — वहाँ अलंकार एक तनाव है जो बाद में खुल जाता है। उन्नीसवीं सदी में, हुमेल और शोपाँ से, यह मुख्य स्वर से शुरू होता है। यहाँ के चित्र बाद वाला पाठ ही दिखाते हैं; पुराने संगीत में संस्करण की भूमिका देखना काम का हिस्सा है, और अच्छा संस्करण यह बात वहीं कह देता है।

एक अलंकार में कितने स्वर समाते हैं, यह कोई चिह्न नहीं बताता। यह गति और वाद्य पर निर्भर करता है: यहाँ चार बारियों के साथ खोलकर लिखा गया है, वह धीमे हिस्से में कम होगा और तेज़ हिस्से में ज़्यादा।

दो, जिन्हें स्वरों में नहीं खोला जा सकता

इस पंक्ति में दो चिह्न नहीं हैं, आर्पेज्जो और ग्लिसान्दो, और इसका एक ही कारण है: इनके स्वर तय नहीं हैं। स्वरमेल के आगे की लहरदार रेखा कहती है कि उसकी ध्वनियाँ एक के बाद एक आती हैं — कितनी तेज़ी से, यह नहीं कहती। दो स्वरों के बीच की रेखा कहती है कि उनके बीच का रास्ता भी बजता है — पियानो पर वे रास्ते में पड़ने वाली कुंजियाँ, वायलिन पर बिना सीढ़ियों की फिसलन। बीच में क्या होगा, यह वाद्य ही तय करता है, और इसीलिए उसे स्वरों में नहीं रखा जा सकता।

संगीत चिह्न · ध्वनि की तीव्रता · स्वरों की अवधि · संगीत शब्दकोश

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इस पन्ने का हर स्वर गिना गया है, कहीं से उतारा नहीं गया।